केपटाउन, 16 अप्रैल ।
इस एक शख्स पर सभी की निगाहें होंगी। दर्शकों की, टीम मालिकों की, बाकी टीमों के खिलाड़ियों की, खुद अपने देश के साथी खिलाड़ियों की और राहुल द्रविड़ की। जी हां, बेंगलुरु रॉयल चैलेंजर्स की कमान संभालने वाले इंग्लैंड के पूर्व कप्तान कैविन पीटरसन सभी की निगाहों में होंगे, लिहाजा उन पर उम्मीदों का भार चौगुना है। बेंगलुरु रॉयल चैलेंजर्स को टेस्ट टीम कहे जाने से खफ़ा टीम के मालिक विजय माल्या ने पहले सीजन के आखिर में ही तय कर लिया था कि राहुल द्रविड़ को अगले सत्र में कप्तानी नहीं सौंपी जाएगी, और टीम में बदलाव किया जाएगा। इसी कड़ी में दूसरे सत्र के दौरान खिलाड़ियों की बोली लगी तो माल्या ने हर हाल में पीटरसन को खरीद डाला। इसके लिए उन्हें छह करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने पड़े, लेकिन माल्या खुश थे कि उन्होंने पीटरसन को अपनी टीम के साथ जोड़ लिया।
ऐसे में, बेंगलुरू रॉयल चैलेंजर्स की टीम शनिवार को जब इंडियन प्रीमियर लीग के दूसरे संस्करण के अंतर्गत मौजूदा चैंपियन राजस्थान रॉयल्स टीम के खिलाफ मैदान में उतरेगी, तब उसकी निगाहें नवनियुक्त कप्तान केविन पीटरसन पर ही लगी होंगी।
राहुल द्रविड़ की अगुआई में टीम टूर्नामेंट के पहले संस्करण में सातवें स्थान पर रही थी। अब उसकी निगाह आठ टीमों के इस टूर्नामेंट में अपनी स्थिति बेहतर करने पर है और इस सफर में पीटरसन की सफलता उसके लिए काफी मायने रखेगी।
पीटरसन के अलावा रॉयल चैलेंजर्स को द्रविड़, जैक्स कालिस, मार्क बाउचर और वसीम जाफर से काफी उम्मीदें होंगी। इसके अलावा टीम को रॉस टेलर, रोबिन उथप्पा, जेसी राइडर, कैमरून व्हाइट, प्रवीण कुमार और नेथन ब्रेकन के चमकने से भी फायदा हो सकता है।
पहले संस्करण की नाकामी से नाराज टीम के मालिक विजय माल्या ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी चारू शर्मा को बाहर का रास्ता दिखाया था। इसके बाद माल्या ने पीटरसन को अपनी टीम में शामिल किया। पीटरसन आईपीएल के सबसे महंगे खिलाड़ी के तौर पर उभरे थे। ऐसे में माल्या हर हाल में अपनी टीम को जीतते देखना चाहेंगे।
आईपीएल का दक्षिण अफ्रीका स्थानांतरित होना रॉयल चैलेंजर्स टीम के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है क्योंकि उसकी टीम में चार ऐसे खिलाड़ी हैं, जो दक्षिण अफ्रीका के हैं। इन खिलाड़ियों को यहां के हालात का अच्छा अनुभव है और इसी अनुभव के दम पर वे अपनी टीम को सफलता दिला सकते हैं।
ये पांच खिलाड़ी हैं डेल स्टेन, कालिस, बाउचर, रुएलोफ वान डेर मर्व और डिल्लन ड्यू प्रीज। इसके अलावा टीम के कोच रे जेनिंग्स भी दक्षिण अफ्रीका के ही हैं।
लेकिन,इन सभी संभावनाओं के बीच खुद पीटरसन को भी अपनी कसौटी पर खरा उतरना होगा। कैविन पीटरसन मूलत दक्षिण अफ्रीका के हैं,और नस्लीय भेदभाव से नाराज होकर अपनी मां के मुल्क इंग्लैंड आ गए। इंग्लैंड में टीम में अपनी जगह बनाने के लिेए उन्होंने कड़ा संघर्ष भी किया। लेकिन,पीटरसन को दक्षिण अफ्रीका के कई दर्शक और साथी खिलाड़ियों ने माफ नहीं किया। ऐसे में,दक्षिण अफ्रीका के मैदानों पर पीटरसन को 'हूटिंग' सहनी पड़ सकती है। इस माहौल में उन पर खासा दबाव होगा। फिर, भले पीटरसन कप्तानी संभाल चुके हैं, लेकिन उनकी कप्तानी का रिकॉर्ड सामान्य है। पीटरसन अपने आप में बेहतरीन खिलाड़ी हैं, लेकिन क्रिकेट के इस फॉर्मेट में उनका खेल कैसा रहेगा-ये वक्त बताएगा। इसके अलावा, पीटरसन को अपनी कीमत को भी सही साबित करने का दबाव होगा।
टीम इस प्रकार है : केविन पीटरसन (कप्तान), रॉस टेलर, वसीम जाफर, राहुल द्रविड़, रोबिन उथप्पा, मनीष पांडेय, जेसी राइडर, मार्क बाउचर, श्रीवत्स गोस्वामी, डिल्लन ड्यू प्रीज, जैक्स कालिस, रुएलोफ वान डेर मर्व, कैमरून व्हाइट, विराट कोहली, प्रवीन कुमार, बालचंद्र अखिल, डेल स्टेन, नेथन ब्रेकन, पंकज सिंह, अनिल कुंबले, टीनू योहानन और विजय कुमार।