एक चीयरलीडर की डायरी के संपादित अंश :
आज मेरे साथ जो हुआ, उसे मैं ताउम्र भूल नहीं पाऊंगी। आईपीएल टीम ..... के मालिक .......साहब कल तक मुझे पुचकारते और कहते कि इस बार चीयरलीडर्स के ग्रुप में तुमसे अच्छा कोई नहीं है। टेलीविजन के स्क्रीन पर तुम ज्यादा देर दिखीं तो तुम्हें फिल्मों का ऑफर मिल सकता है। तुम्हारे पास अदा है,एटीट्यूड है और खूबसूरत तो तुम बला की हो....। मालिक इतना कहे तो फिर सोचने की क्या बात है !
लेकिन, आईपीएल दक्षिण अफ्रीका ट्रांसफर क्या हुआ ..... साहब को अचानक मुझमें खोट दिखायी देने लगा। मंदी की मार में हमारा टिकट काट दिया गया। अब, हम आईपीएल में हिस्सा लेने दक्षिण अफ्रीका नहीं जाएंगे। 24 लड़कियों के ग्रुप में सिर्फ 12 लड़कियों को हरी झंडी मिली है,और वो सब गोरी चमड़ी वाली विदेशी लड़कियां हैं।
मुझे दुख इस बात का नहीं है कि आखिरी वक्त में मेरा टिकट काट दिया गया। अब,शिकायत करुं तो किससे? अपना दुखड़ा रोऊं तो किससे। मालिक लोग टीम के खिलाड़ियों का पत्ता काट रहे हैं। हमें तो भेजा नहीं गया, कुछ को तो बिना खेले रिटर्न टिकट थमा दिया गया है।
हां,मेरे दुख की बात। मुझे सच में दुख इस बात का है कि चीयरलीडर बनने के लिए मैंने कितने पापड़ बेले। अच्छी खासी खाते पीते घर की हूं, लेकिन चीयरलीडर बनने के लिए दो महीने तक जिम में पसीना बहाया। घर वालों ने कहा-ऐसे कपड़े पहनोगी तो उनसे लड़ गई। मुहल्ले के लड़कों ने छेड़ा-चीयरलीडर हमें भी चीयर करो तो मन मसोस के रह गई कि आखिर चीयरलीडर बनने जा रही हूं। फिर, सोचा था कि आईपीएल के दौरान मोटी कमाई भी हो जाएगी। लेकिन हुआ क्या ?
दक्षिण अफ्रीका जाने वाली लड़कियों में मेरा नाम रखा ही नहीं गया। यहां तक कि मुझे बताया भी नहीं। सिर्फ फरमान सुना दिया। अब......साहब को मैं सुदर नहीं दिखती। मेरी अदाएं,एटीट्यूड कुछ नहीं दिखता।
सच है,पैसे से सबकी आँखें बंद हो जाती हैं। उनकी भी,जिनके दो जून की रोटी की दरकार है, और उनकी भी जो सैकड़ों लोगों को दो जून की रोटी देते हैं। खैर, मैं चीयरलीडर नहीं बन पाई....शायद मेरी किस्मत में चीयरलीडर बनना लिखा ही नहीं है।
- प्रतीक