पीयूष
दिन-8 जून
वक्त- रात के 11 बजे
जगह- लॉर्ड्स
साला-मैच के बाद कप्तानों से इंटरव्यू की परंपरा ही खत्म कर देनी चाहिए। बोलकर बवाल हो, इससे तो अच्छा है कि आदमी अपने मुंह पर टेप लगाकर बैठ जाए। मैंने कल सच सच बोल दिया कि सुपर-आठ में नहीं पहुंचेंगे तो भूचाल नहीं आ जाएगा। अब, पाकिस्तानी मीडिया इसी बयान को लेकर मेरी ऐसी तैसी करने में जुटा है।
इंग्लैंड से हार गए तो क्या जलजला आ गया। धरती फट गई। क्या हुआ ? इंग्लैंड अपने ही मुल्क में हार जाता तो क्या अच्छा लगता ? अंग्रेजों ने राज किया हम पर इतने साल। थोड़ा बहुत भाईचारा रहा है हमारा। वो जीत गए तो पहुंच गए सुपर-8 में। हम भी जीत जाएंगे हॉलैंड से। मान लो, नहीं पहुंचे तो क्या तूफान आ लेगा। हमारे मुल्क में कोई सीरियस हुआ है किसी काम को लेकर। सीरियस होकर खेलने का ठेका क्या हमने ही लिया है? सरकार खेल रही है इतने दिनों से तालिबान के साथ। वो कभी सीरियस हुई भला ! इतने दिनों से हिन्दुस्तान चीख रहा है- ये लो दाऊद का पता-ठिकाना और दाऊद दो। वो कभी सीरियस नहीं हुई ! और हमसे कहते हैं कि सीरियसली खेलो।
अकरम भाई को बुरा लगा जो मैंने कह डाला कि टी-20 तो सिर्फ मनोरंजन के लिए है। अबे, कमेंट्री बॉक्स में बैठकर चूं-चूं करने में थोड़े कुछ लगता है। अगर मेरी अंग्रेजी ठीक हो तो मैं बैठ जाऊं और ब्रैडमैन की ऐसी-तैसी कर दूं। अकरम भाई, खुद कभी टी-20 खेला होता, तो मालूम पड़ता कि ये किस बला का नाम है। फिर, मुझे क्यों दोष देते हो? मैंने तो बनाए 45-50 रन। वो अफरीदी-बड़ा हार्ट हिटर बना फिरता है। क्या किया गया उससे? फील्डिंग में तो भाईलोग ऐसे गेंद पकड़ रहे थे मानों गेंद नहीं आग का गोला हो।
और बच्चों से क्या कहना। टीम के नए बच्चे कह रहे थे- युनूस भाई, हम तो यहां इंग्लैंड यह सोच कर आए थे कि टी-20 में चीयरलीडर्स दिखेंगी। ठुमका लगाते हुए। रंग-रंगीली पोशाकों में। जैसे आईपीएल में टेलीविजन पर दिखी थी। लेकिन,यहां तो चार-छह चीयरलीडर्स हैं, और वो हमारे हारने जीतने से बेखबर हर बात पर नाचने लगती हैं। आईपीएल में पीली वाली सिर्फ चेन्नई के लिए नाचती थीं, और नीली वाली सिर्फ राजस्थान के लिए। लेकिन,यहां लगता ही नहीं कि हमसे मुहब्बत है उन्हें। ‘एक्सक्लूसिव’ हौसलाफजाई नहीं करती,इसलिए खेलने में मजा नहीं आता। और उनकी पोशाक ! ऐसा लगता है कि मानो बुरके को मात देने की तैयारी कर रही हों।
बहरहाल, मैं अपनी बात पर कायम रहूंगा। वैसे भी, क्या होगा। पाकिस्तानी क्रिकेट की सदियों पुरानी परंपरा के तहत कप्तान के तौर पर मेरी बलि तो अब ली ही जानी है। चलूं......थोड़ी लंदन की रंगीनियां देख लूं और शॉपिंग कर आऊं। वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद पाकिस्तानी बोर्ड दो-चार साल फिर यह मौका नहीं देगा !