डेनियल विटोरी की गेंद पर स्विच हिट की कोशिश में कैविन पीटरसन बोल्ड हो गए तो उनका इजाद किया ये स्ट्रोक विवादों में नहीं था। कहीं ये बहस नहीं छिडी कि बल्लेबाज आखिरी वक्त में अपना स्टांस बदलकर एक एडवांटेज ले रहा है। एक साल पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ चेस्टर ले स्ट्रीट में स्कॉट स्टाइरिस के खिलाफ उन्होंने आखिरी क्षणों में दांहिने हाथ की जगह बाएं हाथ के बल्लेबाज का ग्रिप अपनाते हुए दो बेमिसाल छक्के लगाये थे। उस वक्त क्रिकेट पंडितों का कहना था कि अगर गेंदबाज को गेंद फेंकने से पहले अंपायर को बताना पड़ता है कि वो किस हाथ से गेंद फेंकेगा तो बल्लेबाज को भी ये जिमेदारी पूरी इमानदारी से निभानी चहिये।
लेकिन,रविवार को बहस नहीं एक सवाल था। वो ये कि पीटरसन को इस वक्त ऐसा स्ट्रोक खेलना चाहिए था या नहीं। इस एक गेंद से पहले पीटरसन आईपीएल में अपनी खोयी लय पाते हुए दिख रहे थे। विटोरी के खिलाफ वो सीधा छक्का जड़ अपने इरादे जाहिर भी कर चुके थे। इससे पहले, पिछली तीन परियों में वो कुल जमा 8 गेंद खेल पाये थे। उनके बल्ले से सिर्फ 11 रन ही स्कोर बोर्ड पर दर्ज हो पाए थे। यह पीटरसन अगर अपनी खोयी लय पा रहा हो तो कौन उन्हें क्रीज़ से वापस लौटता देखना चाहेगा। कम से कम रोयल चैलेंजर्स तो बिलकुल नहीं, जिसने पीटरसन की तीन नाकाम पारियों में तीन हार देखी हैं।
लय में आते टूर्नामेंट के सबसे महंगे खिलाड़ी से उनकी टीम को बड़ी पारी की दरकार थी। कप्तान के नाते उनकी ज़िम्मेदारियां कहीं ज्यादा थी। खासकर, उस बेंगलुरु रॉयल चैलेंजर्स को, जो पिछले आईपीएल की नाकामियों को पीटरसन के सहारे भरपाई करना चाहती है। इस दबाव के बीच पीटरसन को अपनी पारी को एक मुकम्मल शक्ल देनी थी,जो दोनों सलामी बल्लेबाजों के जल्द आउट होने से गहरा गया था। जैक कालिस तो मुकाबले की पहली ही गेंद पर बोल्ड हो गए थे। उनकी जगह पीटरसन ने संभाली थी। इस दोहरे दबाव के बावजूद पीटरसन अपनी पहचान के मुताबिक पारी को गढ़ने में जुटे थे। वो सिर्फ सीधे बल्ले से बड़े स्ट्रोक्स ही नहीं खेल रहे थे,वो अभी तक प्रतियोगिता के सबसे बड़े मैदान में गेंद को डीप फील्ड में धीरे से धकेल कर हर मुमकिन रन के लिये खुद को झोंक भी रहे थे।
लेकिन विटोरी की गेंद पर इस एक स्ट्रोक ने पीटरसन की परवान चढ़ती पारी को अचानक थाम दिया। रॉयल चैलेंजर्स को मिली थोड़ी-बहुत बढ़त खत्म कर दी। इसकी झलक खुद पर नाराजगी जाहिर करते पीटरसन को देख महसूस की जा सकती थी। आखिरी ओवर में जब दिलशान की एक और बेहतरीन पारी ने रॉयल चैलेंजर्स से मुकाबला खींच लिया तो शायद पीटरसन को अपने उस एक स्ट्रोक पर बहुत खीझ आ रही होगी।
लेकिन, बड़ा सवाल ये कि पीटरसन ऐसा अजीबोगरीब स्ट्रोक खेलने से पहले इसका जोखिम कैसे भूल गए। जब सीधे बल्ले से अपनी लय मे लौट रहे थे, तो वो अचानक राह कैसे भटक गए। इस टूर्नामेंट का सबसे मंहगा खिलाड़ी होने के नाते बेंगलुरु रॉयल चैलेंजर्स की किस्मत बदलने की उम्मीद है उनसे। उनकी हर पारी पर सबकी नज़र है। इसके अलावा, कप्तानी छोड़ने के बाद से पीटरसन की हर पारी का इंग्लैंड का मीडिया पोस्टमार्टम कर रहा है।
डेक्कन चार्जर्स के खिलाफ मुकाबले में प्रज्ञान ओझा की गेंद पर स्टम्प होने पर उनके साढ़े सात करोड़ की कीमत की तुलना प्रज्ञान ओझा के 30 लाख से की जा रही थी। फिर, पीटरसन अपने असली घर दक्षिण अफ्रीका में खेल रहे हैं। यहाँ खेलते हुए उनके सामने पहचान का संकट दोहरा हो जाता है। 2005 में इंग्लैंड की तरफ से अपने वनडे करियर का आगाज करने पीटरसन यहाँ लौटे तो उन्हें लोगों की नाराज़गी का सामना करना पड़ा था। लेकिन पांच वनडे मैचों की सीरिज में तीन सेंचुरी जड़ते हुए उन्होंने सबकी नाराजगी को दीवानगी में बदल दिया था। कुछ इस अंदाज में मानो दक्षिण अफ्रीका के कोटा सिस्टम की वजह से इंग्लैंड जाने के फैसले को सही ठहरा रहे हों।
अपने इसी मुल्क दक्षिण अफ्रीका में पीटरसन अपनी पहचान को और मजबूती से गढ़ना चाहेंगे। शायद,पहचान के संकट का यही दबाव उन्हें एक बड़ा जोखिम लेने के लिए तैयार कर गया। वो जानते थे कि हर गुजरते मुकाबले के साथ उनके पास वक़्त खत्म होता जा रहा है। अब वो बमुश्किल एक या दो मैच ही खेल सकते हैं। पांच मई से वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू सीरिज में उन्हें हिस्सा लेना है।
आईपीएल से विदाई की आहट के बीच खुद को साबित करने की चुनौती, अपनी पहचान को बनाए रखने का दबाव और टीम को हर हाल में शिखर तक देखने के ख्वाब में शायद पीटरसन उस एक लम्हे में अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाये। उनके वापस लौटते ही मुकाबला दिल्ली की ओर मुड़ गया था। इस हद तक कि पहले 6 ओवर में सहवाग और गंभीर के विकेट हासिल करने के बावजूद टीम इस मुकाबले को जीत तक नहीं ले जा पायी। वो जीत, जो अब इस प्रतियोगिता में बेंगलुरु से ज्यादा पीटरसन से जुड़ गयी है। यानि पीटरसन अब बुधवार को कोलकाता के खिलाफ उतरेंगे तो पहले से जयादा दबाव में होंगे। अपनी पहचान के दबाव के बीच।