मेलबर्न, 6 फरवरी
डे-नाइट टेस्ट मैच के सपने को हकीकत बनने में अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। इसके पीछे की वजह यह है कि गुलाबी गेंद के साथ क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का प्रयोग नाकाम होता नजर आ रहा है।
स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक फ्यूचर्स लीग मैचों में हिस्सा ले रहे खिलाड़ियों और अधिकारियों ने इस गेंद के जल्दी खराब होने की बात कही है। इस लीग में गुलाबी रंग की गेंद का इस्तेमाल किया जा रहा है। अंपायरों ने हाल ही में कहा था कि स्क्वायर लेग पर खड़े रहने के दौरान एक हद के बाद गेंद को देखना मुश्किल हो जाता है। 'द आस्ट्रेलियन' की एक रिपोर्ट में कहा गया है, 'अधिकारियों ने कहा कि कूकाबूरा गेंद अपना रंग बरकरार रखती है, लेकिन काफी जल्दी खराब हो जाती है और टेस्ट क्रिकेट की जरूरत के मुताबिक 80 ओवर तक इससे खेलना मुश्किल है।
सूत्रों के मुताबिक गेंद ट्रायल में उपयोगी रही, लेकिन टेस्ट मैचों में इस्तेमाल से पहले गेंद को और अधिक विकसित करने की जरूरत है। दक्षिण ऑस्ट्रेलिया सेकेंड इलेवन के तेज गेंदबाज इलियट ओपी ने कहा कि यह गेंद पारंपरिक लाल गेंद की तुलना में जल्दी खराब हो जाती है। इस बीच उपयुक्त गेंद की तलाश में कूकाबूरा की प्रतिस्पर्धी इंग्लैंड की ड्यूक कंपनी के प्रबंध निदेशक दिलीप जाजोडिया ने चमकीली संतरी गेंद के उपायोग का सुझाव दिया है। संतरी गेंद का 1990 के मध्य में ट्रायल किया गया था लेकिन वह प्रयोग कामयाब नहीं हो पाया था। जाजोडिया ने कहा, 'मेरा नजरिया है कि चमकीली संतरी गेंद के पास सबसे अच्छा मौका है। मैंने काफी दर्शकों से बात की है और उन्होंने हमेशा संतरी गेंद का पक्ष लिया।'